Ertugrul Ghazi : ऐसा क्या हैं इस टीवी शो में जिसपे दुनिया पागल हो गयी हैं


Ertugrul Ghazi photo


एर्तुग्रुल ग़ाज़ी (Ertugrul Ghazi Story in Hindi) यह एक टर्की का जाना-माना टीवी शो हैं. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी शो को इंडिया के साथ-साथ कई मुस्लिम देशों में खूब पसंद किया जा रहा हैं. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी टर्की का एक महान शासक था. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी शो पे चर्चा बहुत तेज़ हो गयी हैं. लोग एर्तुग्रुल ग़ाज़ी शो को एक-दूसरे को सोशल मीडिया शेयर हैं. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी टीवी शो एक सच्चे कहानी पे आधारित हैं. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी शो 150 देशों में टीवी पे दिखाया जा रहा हैं.


एर्तुग्रुल ग़ाज़ी की पूरी कहानी हिंदी में (Ertugrul Ghazi Story in Hindi)
यह कहानी हैं 13वीं सदी की जब चंगेज खान की मंगोली सेना एकदम लूटपाट उतारू थी. मंगोल जहाँ भी लूटपाठ करते वो किसी को नहीं छोड़ते वो चाहे बच्चे हो या बुगुर्ज। मंगोली सेना सबके पीछे पड़ी थी और लोग मंगोली सेना से बहुत परेशान थे. जब मंगोल खोवारिजम इलाके पहुंची तो यहाँ एक कबीला था. जिसको छोड़ के चंगेज़ खान भागा। कबीले का नाम काई कबीला था . काई कबीले का सुल्तान था सुलेमान शाह. सुल्तान सुलेमान शाह के चार बेटे थे. तीसरे नंबर का बेटा था एर्तुग्रुल ग़ाज़ी। जिसके जांबाज कारनामों पे बना हैं टीवी शो एर्तुग्रुल ग़ाज़ी। सजूकी सल्तनत की शहज़ादी हीलिमा, उसके भाई और बाप को ईसाईयों ने कैद कर लिया था. जंगल के रास्ते जब ईसाई इनको महल ले जा रहे थे. तभी एर्तुग्रुल ग़ाज़ी वहां पहुंच के शहज़ादी हलीमा, उसके भाई और बाप को ईसाईयों से छुड़ा लेता हैं. बस यहीं से शरुआत होती है जाबाज़ एर्तुग्रुल ग़ाज़ी की कहानी। इसके बाद ईसाईयों के तरफ से काई कबीले पे जो भी परेशानी आती गयी. उसका सामना एर्तुग्रुल ग़ाज़ी ने दिलेरी से किया। अब एर्तुग्रुल ग़ाज़ी के सामने एक चुनौती थी ईसाईयों के कबीले पे फतह करना। उस समय ईसाईयों को नाईट मेयर भी कहा जाता था. ईसाई अपने कबीले से मुस्लिमों के ऊपर हमला करने की तैयारी में थे तभी एर्तुग्रुल ग़ाज़ी ईसाईयों के कबीले पर हमला कर ईसाई कबीले पे फतह कर लेता हैं. जिससे  एर्तुग्रुल ग़ाज़ी का दुनिया में डंका बजने लगता है. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी नाम का एक ऐसा तूफ़ान उठा की मुसिलमों से नफरत करने वाले इस तूफान में उड़ पड़े.




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एक बार एर्तुग्रुल ग़ाज़ी (Ertugrul Ghazi Story in Hindi) के बाप सुलेमान शाह की नदी में डूबने की वजह से मौत हो जाती हैं. जिसके बाद काई कबीले के लोग एर्तुग्रुल ग़ाज़ी को अपना सुल्तान चुनते हैं. इसके बाद एर्तुग्रुल ग़ाज़ी ने अपने एक भाई और 400 सैनिकों के साथ तुकी के अनातोलिया के तरफ रुख किया। बीच सफर में एर्तुग्रुल ग़ाज़ी ने देखा कि दो सेना आपस में लड़ रही हैं. एक सेना कमजोर थी और जंग हारने के कगार पे आ पहुंची थी. तो एर्तुग्रुल ग़ाज़ी ने हारती सेना का साथ दिया। यह जंग थी सल्जुके सुल्तनत और मंगोलों के बीच. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी को यह नहीं पता था कि यह सेना चंगेज़ खान की हैं और एर्तुग्रुल ग़ाज़ी अपने चार सौ सैनिकों के साथ अलाउद्दीन की सल्जूकी सुल्तनत की सेना में मिल गए. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी ने मंगोलों को इस कदर मारा की मंगोल अपने साथियों को मैदान में छोड़कर भाग गए. और हारती हुई सल्जूकी सेना जीत गयी. जिसके बाद सल्जूकी सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन ने एर्तुग्रुल ग़ाज़ी को अपने शहर के करीब जागीर दे दी. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी के सल्जूकी सल्तनत में आते ही सल्जूकी सल्तनत से रोमी सेना और मंगोल भी डरने लगे. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी के नाम से पुरे देश के बादशाह और उनकी सेना एर्तुग्रुल ग़ाज़ी के नाम से थर-थर कापते थे. सन 1258 इसवीं में एर्तुग्रुल ग़ाज़ी के यहाँ एक लड़का पैदा हुआ. जिसका नाम रखा गया उस्मान। यह वही उस्मान था जिसके नाम पे टर्की की सल्तनत को सल्तनते उस्मानिया कहा जाने लगा. उस्मान भी अपने बाप एर्तुग्रुल ग़ाज़ी की तरह ही जाबाज़ और ज़हीन था. सन 1288 में एर्तुग्रुल ग़ाज़ी की मौत हो जाती हैं. एर्तुग्रुल ग़ाज़ी (Ertugrul Ghazi Story in Hindi) के बेटे उस्मान ने भी अपने बाप की तरह बहुत जंग जीती और उस्मान ने पुरे 40 देश पे कब्ज़ा किया। 1923 तक सल्तनते उस्मानिया ने 40 देश पे राज किया।


Web Tittle:-Ertugrul Ghazi: What is this TV show whose world has gone crazy

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